Surya Grahan 2023 : रक्षाबंधन-जन्‍माष्‍टमी के बाद लगने वाला है सूर्यग्रहण, जानें तारीख

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Surya Grahan 2023 : रक्षाबंधन-जन्‍माष्‍टमी के बाद लगने वाला है सूर्यग्रहण, जानें तारीख

Ring of fire Sun based Obscuration : भारत समेत दुनिया के कई देशों में 31 अगस्‍त को रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा। उसके बाद जन्‍माष्‍टमी सितंबर महीने में आएगी। अक्‍टूबर का महीना भी खास होने वाला है। उस महीने सूर्य ग्रहण (Surya Grahan 2023) लगने जा रहा है।

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अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (Nasa) ने ऐलान किया है कि 14 अक्‍टूबर को चक्राकार सूर्यग्रहण का खास नजारा देखने को मिलेगा। इसेरिंग ऑफ फायर’ भी कहा जाता है। लेकिन क्‍या यह सूर्यग्रहण भारत में दिखाई देगा? आइए जानते हैं।

नासा ने बताया है कि ‘रिंग ऑफ फायर’ को अमेरिका में देखा जा सकेगा। यह ग्रहण अमेरिका के उत्तर में ओरेगॉन से लेकर गल्‍फ ऑफ मैक्सिको तक देखा जाएगा। एक ट्विटर पोस्‍ट में नासा ने ल‍िखा कि सूर्य ग्रहण की इस तारीख को सेव कर लें। 14 अक्‍टूबर को रिंग ऑफ फायर’ अमेरिका ओरेगॉन तट से गल्‍फ ऑफ मैक्सिको का सफर करेगा।

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने बताया है कि वह इस ग्रहण का लाइव कवरेज करेगी। नासा के ऑफ‍िशियल यूट्यूब चैनल पर ग्रहण को देखा जा सकेगा। यानी दुनियाभर के लोग ‘रिंग ऑफ फायर के नजारे को ऑनलाइन लाइव देख सकेंगे।

सूर्यग्रहण की घटना लोगों में दिलचस्‍पी जगाती है, लेकिन इसे नग्‍न आंखों से देखना सेफ नहीं माना जाता। नासा का कहना है कि जो लोग मौके पर मौजूद होकर सूर्यग्रहण का नजारा देखेंगे, वो पिनहोल प्रोजेक्टर की मदद ले सकते हैं। नासा ने बताया है कि चक्राकार या वलयाकार सूर्यग्रहण तब होता है, जब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच से गुजरता है। हालांकि वह सूर्य को पूरी तरह से ढक नहीं पाता और सूर्य पर एक काली डिस्‍क की तरह दिखता है।

खास बात है कि 14 अक्‍टूबर को लगने जा रहा सूर्यग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। ऐसे में जो लोग इससे जुड़ी धार्मिक मान्‍यताओं का पालन करते हैं, उन्‍हें कोई कदम उठाने की जरूरत नहीं होगा। यह ग्रहण अमेरिका और उससे सटे इलाकों में ही दिखाई देगा।

कितने तरह का होता है चंद्र ग्रहण
चंद्र ग्रहण चांद के नजर आने के अनुसार तीन तरह का होता है. पूर्ण चंद्र ग्रहण, आंशिक चंद्र ग्रहण और उपछाया चंद्र ग्रहण. धरती सूरज का चक्कर लगाती है और चांद धरती का चक्कर लगाता है. जब कभी ऐसा समय आता है कि धरती, सूरज और चांद एक सीध में आ जाते हैं तो धरती चांद को पूरी तरह से ढक लेती है जिसके कारण सूर्य की रोशनी चांद पर नहीं पहुंचती है. इसे पूर्ण चंद्र ग्रहण कहते हैं. जब सूरज और चांद के बीच पृथ्वी आ जाती है लेकिन चांद पर सूरज की थोड़ी रोशनी पहुंचती रहती है तो इसे आंशिक चंद्र ग्रहण कहते हैं. यह कम समय के लिए होती है. उपछाया चंद्र ग्रहण में चांद के आकार पर प्रभाव नहीं पड़ता है बस उसमें धुंधलापन आ जाता है.

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