Bhagavad Gita : जीवन में बिल्कुल भी न करें इन 5 चीजों की इच्छा, वरना हमेशा रहेंगे दुखी, होगी पद-प्रतिष्ठा की हानि

गीता के अनुसार मोह क्या है ?मोह घर-परिवार से हो सकता है, सफलता का मोह हो सकता है, सुख-सुविधा और मान-सम्मान का मोह का हो सकता है। जहां मोह रहेगा, वहां दुख तो आएगा ही। मोह जब सफल होता है तो दुख मिलता है और जब असफल होता है तब भी दुख ही मिलता है। श्रीकृष्ण कहते हैं कि जब को मोह त्याग देता है तो उसे मेरी कृपा मिल जाती है।

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Bhagavad Gita : जीवन में बिल्कुल भी न करें इन 5 चीजों की इच्छा, वरना हमेशा रहेंगे दुखी, होगी पद-प्रतिष्ठा की हानि

Bhagavad Gita In Hindi: हिंदू धर्म की पवित्र ग्रंथों में से एक श्रीमद्भागवत गीता को माना जाता है।

भगवान श्री कृष्ण ने कुरुक्षेत्र में महाभारत के युद्ध के दौरान अर्जुन को गीता का संदेश सुनाया था।

बता दें कि श्रीमद्भागवत गीता में भक्ति योग, कर्म योग, एकेश्वरवाद, ज्ञान योग का बहुत ही खूबसूरत तरीके से वर्णन किया गया है।

गीता में मानव जीवन से संबंधी कई समस्याओं का हल भी बताया है। व्यक्ति के जीवन में जब कोई समस्या आती है, तो उसका हल ढूंढने के बजाय वह भागने लगता है। जिस प्रकार महाभारत के युद्ध के दौरान अर्जुन अपनों को खोने के डर से काफी निराश हो गए थे।

इसी तरह कई बार हम भी जीवन में कई समस्याओं को देखकर विचलित हो जाते हैं। ऐसे में श्रीमद् भागवत गीता आपके काम आ सकती है।

भगवान कृष्ण ने गीता के माध्यम से व्यक्ति को सुखी जीवन जीने के कई तरीके बताए है। ऐसे ही उन्होंने ऐसी चार चीजों के बारे में बताया है जिसकी इच्छा व्यक्ति को कभी नहीं करनी चाहिए। इससे उसकी को कष्टों का भागीदार बनना पड़ता है।

श्लोक
परान्नं च परद्रव्यं तथैव च प्रतिग्रहम्।

परस्त्रीं परनिन्दां च मनसा अपि विवर्जयेत।।

अर्थात :- पराया अन्न, पराया धन, पराया दान, पराई स्त्री और दूसरे लोगों की निंदा, इनकी इच्छा मानव को कभी नहीं करनी चाहिए।


रोज गीता पढ़ने से क्या होता है? गीता पढ़ने वाले व्यक्ति को सच और झूठ, ईश्वर और जीव का ज्ञान हो जाता है। उसे अच्छे और बुरे की समझ आ जाती है। गीता पढ़ने से व्यक्ति का आत्मबल बढ़ता है और व्यक्ति साहसी और निडर बनकर अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ता है। रोजाना गीता पढ़ने से शरीर और दिमाग में सकारात्मक ऊर्जा विकसित होती है

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पराया अन्न
श्री कृष्ण कहते हैं कि व्यक्ति को अगर आपना या फिर घर के सदस्यों का पेट भरता है, तो खुद मेहनत करते कमाए गए पैसों से खरीद कर भरें। किसी दूसरे के अन्न में खुद का हक न समझें, क्योंकि वो अन्न भी किसी के द्वारा की गई मेहनत के बाद ही मिला है। ऐसे में अगर आप पराया अन्न की इच्छा रखते हैं,स्वास्थ्य पर अच्छा असर नहीं पड़ता है।

पराया धन
कभी भी दूसरे को धन को अपना नहीं समझना चाहिए। अगर आपने किसी का धन छल से ले लिया है, तो उससे कई गुना गुना अधिक चुकाना पड़ सकता है। यह धन स्वास्थ्य, शिक्षा या फिर किसी अन्य तरह से खर्च हो सकता है।
पराई स्त्री
पराई स्त्री की इच्छा रखना महापाप माना जाता है। जिस तरह आप लहसुन या प्याज खाकर उसकी गंध को नहीं छिपा सकते हैं। इसी रह किसी पराई स्त्री की इच्छा करने से उसे आप छिपा कर नहीं कर सकते हैं। ऐसे में आप अपनी मन और भावनाओं में नियंत्रण रखें, जिससे खुद के साथ घर वालों का सिर कभी न झुके।

दूसरों की निंदा करना
श्री कृष्ण कहते हैं कि व्यक्ति को कभी भी दूसरों की निंदा नहीं करना चाहिए। इससे वह दूसरों की ही नहीं बल्कि खुद का नुकसान करता है। निंदा से किसी भी मनुष्य की बर्बादी शुरू हो जाती है। वह दूसरों के सामने बुरा साबित हो जाता है। इसके साथ ही उसके ऊपर किसी भी तरह का विश्वास, प्रेम नहीं रखते हैं।

डिसक्लेमर- इस लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों जैसे ज्योतिषियों, पंचांग, मान्यताओं या फिर धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है। इसके सही और सिद्ध होने की प्रामाणिकता नहीं दे सकते हैं। इसके किसी भी तरह के उपयोग करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।

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