नहीं रहे सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक बिंदेश्वर पाठक, दिल्ली AIIMS में ली अंतिम सांस

नहीं रहे सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक बिंदेश्वर पाठक, दिल्ली AIIMS में ली अंतिम सांस
नई दिल्ली: सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक बिंदेश्वर पाठक का मंगलवार को निधन हो गया । दिल्ली एम्स में उन्होंने अंतिम सांस ली। सुलभ इंटरनेशनल के ऑफिस में ध्वाजारोहण के कार्यक्रम के दौरान अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें एम्स दिल्ली में भर्ती कराया गया। कार्डियक अरेस्ट होने पर मंगलवार 15 अगस्त करीब डेढ़ बजे एम्स दिल्ली इमरजेंसी में लाया गया। डॉक्टरों ने उन्हें सीपीआर देकर धड़कन वापस पाने की कोशिश की लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। इसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिंदेश्वर पाठक के निधन पर दुख जताया है।

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दो दिन पहले ही पहले ही उन्होंने पटना में आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। बिंदेश्वर पाठक ने 1970 में सुलभ इंटरनेशनल सर्विस ऑर्गनाइजेशन की स्थापना की थी। सामाजिक कार्यकर्ता और ‘सुलभ इंटरनेशनल’ के संस्थापक बिंदेश्वर पाठक ने हाथ से मैला ढोने वालों की दुर्दशा को कम करने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाया था। देश में बड़े पैमाने पर शौचालय का निर्माण बिंदेश्वर पाठक की संस्था सुलभ इंटरनेशनल की ओर से कराया गया है।

बिंदेश्वर पाठक बिहार के वैशाली जिले के रहने वाले थे। उनकी उम्र 80 साल थी। बिंदेश्वर पाठक को साल 1999 में पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया। साल 2003 में विश्व के 500 उत्कृष्ट सामाजिक कार्य करने वाले व्यक्तियों की सूची में उनका नाम प्रकाशित किया गया। बिंदेश्वर पाठक को एनर्जी ग्लोब समेत कई दूसरे पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है।

बिंदेश्वर पाठक द्वारा स्थापित शौचालय संग्राहलय को टाइम पत्रिका ने दुनिया के दस सर्वाधिक अनूठे संग्राहलय में स्थान दिया था। सिर पर मैला ढोने की प्रथा की समाप्ति को लेकर इनके द्वारा किए गए कार्यों की पूरी दुनिया में प्रशंसा हुई। देशभर में सुलभ इंटरनेशनल के करीब 850 शौचालय और स्नानघर हैं। शौचालय के प्रयोग के लिए 5 रुपये और नहाने के लिए दस रुपये लिए जाते हैं। कई जगहों पर इन्हें मुफ्त भी रखा गया है।

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